सूर्य की महादशा: 6 साल में क्या होता है, सभी अंतर्दशाएँ और उनका समय
SuGraha · अपडेट 29 अक्टूबर 2026
सूर्य की महादशा 6 साल की होती है, जो विंशोत्तरी दशा में सबसे छोटी है। इसमें पद, सरकार, पिता, आत्मविश्वास और पहचान की बातें आगे आती हैं। फल आपकी कुंडली में सूर्य के घर और उसकी ताक़त पर टिका है।
सूर्य आत्मा और राजा का ग्रह माना जाता है। इसकी दशा अक्सर इंसान को आगे आकर ज़िम्मेदारी लेने का मौका देती है। इस पेज पर आसान भाषा में समझिए कि सूर्य की महादशा में क्या होता है।
जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।
सूर्य क्या दर्शाता है और इसकी महादशा कितने साल की होती है
सूर्य आत्मविश्वास, पिता, सरकार, पद, मान सम्मान, दिल और आँखों की सेहत का कारक है। कारक यानी उस विषय का मुख्य ग्रह।
विंशोत्तरी दशा में सूर्य की महादशा 6 साल की होती है। यह सबसे छोटी महादशा है।
सूर्य की महादशा कब अच्छी चलती है और कब भारी लगती है
भाव यानी कुंडली का एक घर। सूर्य 10वें घर में हो या मेष राशि में हो, तो इसकी दशा अक्सर पद और पहचान देती है। 3, 6 और 11वें घर का सूर्य भी अच्छा माना जाता है।
सूर्य तुला राशि में कमज़ोर माना जाता है। शनि या राहु के साथ बैठा सूर्य पिता या अफ़सरों से तनाव दे सकता है।
- अच्छे संकेत: सरकारी काम में सफलता, प्रमोशन, नेतृत्व का मौका, मान सम्मान।
- भारी संकेत: अहंकार से झगड़े, अफ़सरों से तनाव, पिता की सेहत की चिंता।
सूर्य महादशा की सभी 9 अंतर्दशाएँ और उनका समय
अंतर्दशा यानी महादशा के अंदर का छोटा दौर। सूर्य की 6 साल की महादशा में 9 अंतर्दशाएँ आती हैं। पहली अंतर्दशा हमेशा सूर्य की अपनी होती है।
हर अंतर्दशा का समय एक तय नियम से निकलता है। महादशा के साल को अंतर्दशा वाले ग्रह के साल से गुणा करके 120 से भाग दिया जाता है। नीचे की तालिका इसी नियम से बनी है।
| क्रम | अंतर्दशा | कितने समय की | आम तौर पर |
|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य में सूर्य | 3 महीने 18 दिन | पिता, सरकार, पद और आत्मविश्वास की बातें आगे आती हैं। महादशा का ग्रह अपनी ही अंतर्दशा में है, इसलिए उसका असर सबसे साफ़ दिखता है। |
| 2 | सूर्य में चंद्र | 6 महीने | मन, माँ, घर और भावनाओं की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 3 | सूर्य में मंगल | 4 महीने 6 दिन | हिम्मत, ज़मीन, भाई और जल्दबाज़ी की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 4 | सूर्य में राहु | 10 महीने 24 दिन | विदेश, नई तकनीक, अचानक मौके और उलझन की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है। |
| 5 | सूर्य में गुरु | 9 महीने 18 दिन | पढ़ाई, संतान, धर्म, सलाह और बढ़त की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 6 | सूर्य में शनि | 11 महीने 12 दिन | मेहनत, नौकरी, अनुशासन और देरी की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रहों में मित्रता नहीं मानी जाती, इसलिए इस दौर में धीरज ज़्यादा चाहिए। |
| 7 | सूर्य में बुध | 10 महीने 6 दिन | पढ़ाई, बातचीत, व्यापार और हिसाब किताब की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है। |
| 8 | सूर्य में केतु | 4 महीने 6 दिन | अलगाव, अध्यात्म और अचानक बदलाव की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है। |
| 9 | सूर्य में शुक्र | 1 साल | रिश्ते, शादी, आराम और सुख सुविधा की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रहों में मित्रता नहीं मानी जाती, इसलिए इस दौर में धीरज ज़्यादा चाहिए। |
सूर्य महादशा में राहु की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 10 महीने 24 दिन की होती है, जो सूर्य की सबसे लंबी अंतर्दशाओं में है। राहु को सूर्य का ग्रहण करने वाला माना जाता है।
इस दौर में पद या मान सम्मान को लेकर उलझन हो सकती है। काग़ज़ और नियम साफ़ रखिए।
सूर्य महादशा में शनि की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 11 महीने 12 दिन की होती है। सूर्य और शनि पिता पुत्र होकर भी आपस में शत्रु माने जाते हैं।
काम में दबाव और अफ़सरों से मतभेद हो सकते हैं। धीरज और विनम्रता इस दौर में सबसे ज़्यादा काम आती है।
सूर्य महादशा में गुरु की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 9 महीने 18 दिन की होती है। सूर्य और गुरु मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर अच्छा चलता है।
पढ़ाई, सम्मान, संतान और बड़ों का आशीर्वाद इस दौर में साथ देता है।
सूर्य की महादशा से पहले और बाद में कौन सी दशा आती है
सूर्य की महादशा से पहले शुक्र की महादशा आती है। सूर्य की महादशा ख़त्म होने के बाद चंद्र की महादशा शुरू होती है, जो 10 साल की होती है।
विंशोत्तरी दशा में 9 ग्रहों की बारी एक तय क्रम में आती है। यह क्रम है केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। पूरा चक्र 120 साल का होता है।
आपकी पहली दशा किस ग्रह की थी, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है। इसीलिए हर व्यक्ति की दशा की तारीख़ें अलग होती हैं।
सूर्य की महादशा में लोग क्या करते हैं
नीचे वे आसान बातें हैं जो परंपरा में की जाती हैं। ये मन को शांत और दिनचर्या को ठीक रखने के लिए हैं। इनसे कोई गारंटी नहीं जुड़ी है।
असली फल सूर्य की आपकी कुंडली में जगह, उसकी ताक़त और चल रही अंतर्दशा से तय होता है। इसलिए किसी बड़े फ़ैसले से पहले अपनी कुंडली देखना ज़रूरी है।
- सुबह सूर्य को जल चढ़ाने की परंपरा है। माना जाता है कि "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप आत्मविश्वास बढ़ाता है।
- पिता और बड़ों का सम्मान कीजिए। सूर्य की दशा में यह सबसे सीधा उपाय माना जाता है।
- सुबह जल्दी उठना और धूप में थोड़ा समय बिताना इस दशा में अच्छा माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Surya mahadasha कितने साल की होती है?
सूर्य की महादशा 6 साल की होती है, जो सबसे छोटी महादशा है। इसमें पहली अंतर्दशा सूर्य की अपनी 3 महीने 18 दिन की होती है।
Surya mahadasha में क्या होता है?
पद, सरकार, पिता, आत्मविश्वास और मान सम्मान की बातें आगे आती हैं। फल सूर्य के घर और ताक़त पर टिका है।
सूर्य की महादशा के बाद कौन सी दशा आती है?
सूर्य के बाद चंद्र की 10 साल की महादशा आती है।
Surya mahadasha rahu antardasha कितनी लंबी होती है?
सूर्य महादशा में राहु की अंतर्दशा 10 महीने 24 दिन की होती है।
क्या सूर्य की महादशा में सरकारी नौकरी मिलती है?
सूर्य सरकार का कारक है, इसलिए मज़बूत सूर्य की दशा में सरकारी काम में मौका माना जाता है। पर नौकरी के लिए 6 और 10वें घर का भी साथ होना चाहिए।
जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।