गुरु की महादशा: 16 साल में क्या होता है, सभी अंतर्दशाएँ और उनका समय
SuGraha · अपडेट 29 अक्टूबर 2026
गुरु की महादशा 16 साल की होती है। इसमें पढ़ाई, ज्ञान, संतान, शादी, धर्म और धन में बढ़त की बातें आगे आती हैं। फल आपकी कुंडली में गुरु के घर और उसकी ताक़त पर टिका है।
गुरु को सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। पर कमज़ोर या ग़लत घर का गुरु भी पूरा फल नहीं दे पाता। इस पेज पर आसान भाषा में समझिए कि गुरु की महादशा में क्या होता है।
जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।
गुरु क्या दर्शाता है और इसकी महादशा कितने साल की होती है
गुरु ज्ञान, शिक्षक, संतान, धर्म, सही सलाह, धन और बढ़त का कारक है। लड़कियों की कुंडली में इसे पति का कारक भी माना जाता है। कारक यानी उस विषय का मुख्य ग्रह।
विंशोत्तरी दशा में गुरु की महादशा 16 साल की होती है।
गुरु की महादशा कब अच्छी चलती है और कब भारी लगती है
भाव यानी कुंडली का एक घर। गुरु 1, 4, 5, 7, 9 या 10वें घर में हो, या कर्क राशि में हो, तो इसकी दशा अक्सर बहुत अच्छी मानी जाती है।
गुरु मकर राशि में कमज़ोर माना जाता है। 6, 8 या 12वें घर का स्वामी होकर गुरु अपना पूरा शुभ फल नहीं दे पाता।
- अच्छे संकेत: पढ़ाई में सफलता, शादी, संतान, बड़ों का साथ, धन में बढ़त।
- भारी संकेत: ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा, वज़न या पेट की परेशानी, ग़लत सलाह।
गुरु महादशा की सभी 9 अंतर्दशाएँ और उनका समय
अंतर्दशा यानी महादशा के अंदर का छोटा दौर। गुरु की 16 साल की महादशा में 9 अंतर्दशाएँ आती हैं। पहली अंतर्दशा हमेशा गुरु की अपनी होती है।
हर अंतर्दशा का समय एक तय नियम से निकलता है। महादशा के साल को अंतर्दशा वाले ग्रह के साल से गुणा करके 120 से भाग दिया जाता है। नीचे की तालिका इसी नियम से बनी है।
| क्रम | अंतर्दशा | कितने समय की | आम तौर पर |
|---|---|---|---|
| 1 | गुरु में गुरु | 2 साल 1 महीने 18 दिन | पढ़ाई, संतान, धर्म, सलाह और बढ़त की बातें आगे आती हैं। महादशा का ग्रह अपनी ही अंतर्दशा में है, इसलिए उसका असर सबसे साफ़ दिखता है। |
| 2 | गुरु में शनि | 2 साल 6 महीने 12 दिन | मेहनत, नौकरी, अनुशासन और देरी की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है। |
| 3 | गुरु में बुध | 2 साल 3 महीने 6 दिन | पढ़ाई, बातचीत, व्यापार और हिसाब किताब की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रहों में मित्रता नहीं मानी जाती, इसलिए इस दौर में धीरज ज़्यादा चाहिए। |
| 4 | गुरु में केतु | 11 महीने 6 दिन | अलगाव, अध्यात्म और अचानक बदलाव की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है। |
| 5 | गुरु में शुक्र | 2 साल 8 महीने | रिश्ते, शादी, आराम और सुख सुविधा की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रहों में मित्रता नहीं मानी जाती, इसलिए इस दौर में धीरज ज़्यादा चाहिए। |
| 6 | गुरु में सूर्य | 9 महीने 18 दिन | पिता, सरकार, पद और आत्मविश्वास की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 7 | गुरु में चंद्र | 1 साल 4 महीने | मन, माँ, घर और भावनाओं की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 8 | गुरु में मंगल | 11 महीने 6 दिन | हिम्मत, ज़मीन, भाई और जल्दबाज़ी की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 9 | गुरु में राहु | 2 साल 4 महीने 24 दिन | विदेश, नई तकनीक, अचानक मौके और उलझन की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है। |
गुरु महादशा में राहु की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 2 साल 4 महीने 24 दिन की होती है और गुरु की महादशा की आख़िरी अंतर्दशा है। गुरु और राहु का मेल गुरु चांडाल योग जैसा असर दे सकता है, ऐसा माना जाता है।
इस दौर में ग़लत सलाह और बड़े जोखिम से बचिए। पर विदेश या नई तकनीक के काम में मौका भी मिल सकता है।
इसके बाद शनि की 19 साल की महादशा शुरू होती है।
गुरु महादशा में शनि की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 2 साल 6 महीने 12 दिन की होती है। इसमें मेहनत और ज़िम्मेदारी बढ़ती है।
गुरु की समझ और शनि की मेहनत साथ मिलें, तो इस दौर में पक्की तरक्की हो सकती है।
गुरु महादशा में केतु की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 11 महीने 6 दिन की होती है। इसमें धर्म, अध्यात्म और गहरी सोच की तरफ़ झुकाव बढ़ता है।
पढ़ाई और रिसर्च के लिए यह समय अच्छा माना जाता है। नौकरी या जगह बदलने का फ़ैसला सोच समझकर लीजिए।
गुरु महादशा में शुक्र की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 2 साल 8 महीने की होती है, जो गुरु की सबसे लंबी अंतर्दशा है। गुरु और शुक्र को आपस में शत्रु माना जाता है।
शादी, सुख सुविधा और धन की बातें आती हैं, पर ख़र्च और दिखावे पर नज़र रखिए।
गुरु की महादशा से पहले और बाद में कौन सी दशा आती है
गुरु की महादशा से पहले राहु की महादशा आती है। गुरु की महादशा ख़त्म होने के बाद शनि की महादशा शुरू होती है, जो 19 साल की होती है।
विंशोत्तरी दशा में 9 ग्रहों की बारी एक तय क्रम में आती है। यह क्रम है केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। पूरा चक्र 120 साल का होता है।
आपकी पहली दशा किस ग्रह की थी, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है। इसीलिए हर व्यक्ति की दशा की तारीख़ें अलग होती हैं।
गुरु की महादशा में लोग क्या करते हैं
नीचे वे आसान बातें हैं जो परंपरा में की जाती हैं। ये मन को शांत और दिनचर्या को ठीक रखने के लिए हैं। इनसे कोई गारंटी नहीं जुड़ी है।
असली फल गुरु की आपकी कुंडली में जगह, उसकी ताक़त और चल रही अंतर्दशा से तय होता है। इसलिए किसी बड़े फ़ैसले से पहले अपनी कुंडली देखना ज़रूरी है।
- माना जाता है कि गुरुवार को विष्णु जी की पूजा और "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का जाप गुरु की दशा में शुभ रहता है।
- शिक्षकों, बड़ों और गुरुजनों का सम्मान कीजिए।
- पढ़ना और सीखना जारी रखिए। गुरु की दशा में ज्ञान ही सबसे बड़ा सहारा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Guru mahadasha कितने साल की होती है?
गुरु की महादशा 16 साल की होती है। इसमें पहली अंतर्दशा गुरु की अपनी 2 साल 1 महीने 18 दिन की होती है।
Guru mahadasha rahu antardasha कितनी लंबी होती है और इसमें क्या होता है?
गुरु महादशा में राहु की अंतर्दशा 2 साल 4 महीने 24 दिन की होती है। इसमें ग़लत सलाह और जोखिम से बचना चाहिए, पर नए मौके भी बन सकते हैं।
Guru mahadasha shani antardasha कितनी होती है?
गुरु महादशा में शनि की अंतर्दशा 2 साल 6 महीने 12 दिन की होती है।
Guru mahadasha ketu antardasha में क्या होता है?
यह 11 महीने 6 दिन की होती है। इसमें धर्म, अध्यात्म और गहरी सोच की तरफ़ झुकाव बढ़ता है।
गुरु के बाद कौन सी दशा आती है?
गुरु की महादशा के बाद शनि की 19 साल की महादशा आती है।
जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।