बुध की महादशा: 17 साल में क्या होता है, सभी अंतर्दशाएँ और उनका समय

SuGraha · अपडेट 29 अक्टूबर 2026

बुध की महादशा 17 साल की होती है। इसमें पढ़ाई, बुद्धि, बातचीत, व्यापार, हिसाब किताब और दोस्तों की बातें आगे आती हैं। फल आपकी कुंडली में बुध के घर और उसकी ताक़त पर टिका है।

बुध बुद्धि का ग्रह है। इसकी दशा अक्सर पढ़ने, लिखने और कारोबार करने वालों के लिए बड़ा मौका लाती है। इस पेज पर आसान भाषा में समझिए कि बुध की महादशा में क्या होता है।

अपनी महादशा और अंतर्दशा अभी देखिए: मुफ़्त

जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।

बुध क्या दर्शाता है और इसकी महादशा कितने साल की होती है

बुध बुद्धि, पढ़ाई, बोलचाल, लिखना, व्यापार, गणित, दोस्त और त्वचा का कारक है। कारक यानी उस विषय का मुख्य ग्रह।

विंशोत्तरी दशा में बुध की महादशा 17 साल की होती है।

बुध की महादशा कब अच्छी चलती है और कब भारी लगती है

भाव यानी कुंडली का एक घर। बुध कन्या राशि में हो, या अपनी मिथुन राशि में हो, तो इसकी दशा अक्सर अच्छी मानी जाती है।

बुध मीन राशि में कमज़ोर माना जाता है। 6, 8 या 12वें घर का बुध बेवजह की चिंता और बहस बढ़ा सकता है।

  • अच्छे संकेत: पढ़ाई में सफलता, व्यापार में मुनाफ़ा, लेखन या बोलने के काम में नाम।
  • भारी संकेत: ज़्यादा सोचना, बातों में उलझना, हिसाब में ग़लती।

बुध महादशा की सभी 9 अंतर्दशाएँ और उनका समय

अंतर्दशा यानी महादशा के अंदर का छोटा दौर। बुध की 17 साल की महादशा में 9 अंतर्दशाएँ आती हैं। पहली अंतर्दशा हमेशा बुध की अपनी होती है।

हर अंतर्दशा का समय एक तय नियम से निकलता है। महादशा के साल को अंतर्दशा वाले ग्रह के साल से गुणा करके 120 से भाग दिया जाता है। नीचे की तालिका इसी नियम से बनी है।

क्रमअंतर्दशाकितने समय कीआम तौर पर
1बुध में बुध2 साल 4 महीने 27 दिनपढ़ाई, बातचीत, व्यापार और हिसाब किताब की बातें आगे आती हैं। महादशा का ग्रह अपनी ही अंतर्दशा में है, इसलिए उसका असर सबसे साफ़ दिखता है।
2बुध में केतु11 महीने 27 दिनअलगाव, अध्यात्म और अचानक बदलाव की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है।
3बुध में शुक्र2 साल 10 महीनेरिश्ते, शादी, आराम और सुख सुविधा की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है।
4बुध में सूर्य10 महीने 6 दिनपिता, सरकार, पद और आत्मविश्वास की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है।
5बुध में चंद्र1 साल 5 महीनेमन, माँ, घर और भावनाओं की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रहों में मित्रता नहीं मानी जाती, इसलिए इस दौर में धीरज ज़्यादा चाहिए।
6बुध में मंगल11 महीने 27 दिनहिम्मत, ज़मीन, भाई और जल्दबाज़ी की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है।
7बुध में राहु2 साल 6 महीने 18 दिनविदेश, नई तकनीक, अचानक मौके और उलझन की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है।
8बुध में गुरु2 साल 3 महीने 6 दिनपढ़ाई, संतान, धर्म, सलाह और बढ़त की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है।
9बुध में शनि2 साल 8 महीने 9 दिनमेहनत, नौकरी, अनुशासन और देरी की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है।

बुध महादशा में राहु की अंतर्दशा

यह अंतर्दशा 2 साल 6 महीने 18 दिन की होती है। इसमें नई तकनीक, इंटरनेट और विदेश से जुड़े काम आगे बढ़ते हैं।

बातों और काग़ज़ों में धोखे से बचिए। हर समझौता पढ़कर ही कीजिए।

बुध महादशा में शनि की अंतर्दशा

यह अंतर्दशा 2 साल 8 महीने 9 दिन की होती है। बुध और शनि मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर अच्छा चलता है।

मेहनत से किए व्यापार और नौकरी में पक्की बढ़त मिल सकती है।

बुध महादशा में केतु की अंतर्दशा

यह अंतर्दशा 11 महीने 27 दिन की होती है। इसमें मन थोड़ा उचट सकता है और ध्यान बँट सकता है।

रिसर्च और गहराई वाली पढ़ाई के लिए यह समय अच्छा माना जाता है।

बुध की महादशा से पहले और बाद में कौन सी दशा आती है

बुध की महादशा से पहले शनि की महादशा आती है। बुध की महादशा ख़त्म होने के बाद केतु की महादशा शुरू होती है, जो 7 साल की होती है।

विंशोत्तरी दशा में 9 ग्रहों की बारी एक तय क्रम में आती है। यह क्रम है केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। पूरा चक्र 120 साल का होता है।

आपकी पहली दशा किस ग्रह की थी, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है। इसीलिए हर व्यक्ति की दशा की तारीख़ें अलग होती हैं।

बुध की महादशा में लोग क्या करते हैं

नीचे वे आसान बातें हैं जो परंपरा में की जाती हैं। ये मन को शांत और दिनचर्या को ठीक रखने के लिए हैं। इनसे कोई गारंटी नहीं जुड़ी है।

असली फल बुध की आपकी कुंडली में जगह, उसकी ताक़त और चल रही अंतर्दशा से तय होता है। इसलिए किसी बड़े फ़ैसले से पहले अपनी कुंडली देखना ज़रूरी है।

  • माना जाता है कि बुधवार को गणेश जी की पूजा और "ॐ बुं बुधाय नमः" का जाप बुद्धि को तेज़ रखता है।
  • परंपरा में बुधवार को गाय को हरी घास खिलाना अच्छा माना जाता है।
  • रोज़ कुछ पढ़िए और लिखिए। अपनी बात साफ़ और सच्चाई से कहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Budh mahadasha कितने साल की होती है?

बुध की महादशा 17 साल की होती है। इसमें पहली अंतर्दशा बुध की अपनी 2 साल 4 महीने 27 दिन की होती है।

Budh mahadasha में क्या होता है?

पढ़ाई, बातचीत, व्यापार और हिसाब किताब की बातें आगे आती हैं। फल बुध के घर और ताक़त पर टिका है।

Budh mahadasha rahu antardasha कितनी होती है?

बुध महादशा में राहु की अंतर्दशा 2 साल 6 महीने 18 दिन की होती है।

Budh mahadasha shani antardasha में क्या होता है?

यह 2 साल 8 महीने 9 दिन की होती है। बुध और शनि मित्र माने जाते हैं, इसलिए मेहनत का अच्छा फल मिल सकता है।

बुध के बाद कौन सी दशा आती है?

बुध की महादशा के बाद केतु की 7 साल की महादशा आती है।

अपनी महादशा और अंतर्दशा अभी देखिए: मुफ़्त

जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।

और पढ़िए