भकूट दोष क्या है? 7 अंक, 2/12, 6/8, 5/9 और यह कब नहीं लगता

SuGraha · अपडेट 29 अक्टूबर 2026

भकूट दोष कुंडली मिलान की एक जाँच है, जो वर और कन्या की चंद्र राशि की दूरी से बनती है। अगर दोनों राशियाँ एक दूसरे से 2 और 12, 6 और 8, या 5 और 9 की दूरी पर हों, तो भकूट दोष माना जाता है और 7 में से 0 अंक मिलते हैं। बाकी हालात में पूरे 7 अंक मिलते हैं।

यह दोष भी अक्सर हट जाता है। जैसे दोनों राशियों का मालिक ग्रह एक हो। नीचे आसान तालिका से समझिए कि आपके मिलान में भकूट कैसा है।

दो कुंडलियाँ मुफ़्त मिलाइए

36 गुण, नाड़ी, भकूट और मांगलिक जाँच 1 मिनट में, अपनी जन्म तारीख़ों से।

भकूट क्या है

भकूट शब्द का मतलब है राशि का मेल। यहाँ चंद्र राशि देखी जाती है। चंद्र राशि यानी जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। यह सूर्य राशि से अलग होती है।

मिलान के 36 अंकों में भकूट के 7 अंक हैं। नाड़ी के 8 अंकों के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है।

गिनती ऐसे होती है। एक की चंद्र राशि से दूसरे की चंद्र राशि तक गिनिए। जैसे मेष से सिंह तक गिनें तो सिंह 5वीं राशि है, और सिंह से मेष तक गिनें तो मेष 9वीं। इसे 5/9 का रिश्ता कहते हैं।

कौन सा रिश्ता अच्छा, कौन सा दोष

राशियों के बीच कुल 7 तरह के रिश्ते बनते हैं। इनमें 3 को भकूट दोष माना जाता है।

राशियों की दूरीनामअंकपुरानी मान्यता
एक ही राशिसम राशि7अच्छा मेल
3 और 11तृतीय एकादश7अच्छा मेल
4 और 10चतुर्थ दशम7अच्छा मेल
7 और 7सम सप्तक7अच्छा मेल
2 और 12द्विर्द्वादश0पैसे और खर्च को लेकर खिंचाव
6 और 8षडाष्टक0बहस, अनबन और सेहत की चिंता
5 और 9नवपंचम0संतान और सोच में अंतर

भकूट दोष कब नहीं माना जाता

भकूट दोष के परिहार काफ़ी आम हैं। परिहार यानी वह हालत जब दोष हट जाता है।

  • दोनों राशियों का मालिक ग्रह एक ही हो। जैसे मेष और वृश्चिक दोनों का मालिक मंगल है, तो इनका 6/8 दोष नहीं माना जाता।
  • वृषभ और तुला दोनों का मालिक शुक्र है। मकर और कुंभ दोनों का मालिक शनि है। ऐसे जोड़ों में भी दोष हल्का या ख़त्म माना जाता है।
  • दोनों राशियों के मालिक आपस में मित्र हों।
  • कई परंपराओं में नाड़ी के 8 अंक मिल रहे हों और कुल गुण अच्छे हों, तो भकूट को हल्का माना जाता है।

भकूट दोष का असली मतलब

पुराने ग्रंथ 2/12 को पैसे से, 6/8 को झगड़े और सेहत से, और 5/9 को संतान से जोड़ते हैं। ये झुकाव हैं, तय घटनाएँ नहीं।

बहुत से सुखी परिवारों में भकूट दोष होता है। इसलिए सिर्फ़ इस एक जाँच से रिश्ता मत तोड़िए। दोनों की पूरी कुंडली, 7वाँ घर और चल रही दशा भी देखी जानी चाहिए।

अपने मिलान में भकूट कैसे देखें

SuGraha का मुफ़्त मिलान टूल दोनों की जन्म तारीख़ से चंद्र राशि निकालता है और भकूट के अंक दिखाता है। राशि के मालिक एक हों तो वह यह भी बताता है।

उसके बाद आप पूछ सकते हैं कि आपके मिलान में यह दोष कितना असर रखता है। जवाब आपकी अपनी कुंडलियों से बनता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भकूट दोष क्या है?

जब वर और कन्या की चंद्र राशि एक दूसरे से 2/12, 6/8 या 5/9 की दूरी पर हों, तो भकूट दोष माना जाता है। तब मिलान में भकूट के 7 अंक नहीं मिलते।

bhakoot dosh kab nahi lagta?

जब दोनों राशियों का मालिक ग्रह एक हो, जैसे मेष और वृश्चिक, या वृषभ और तुला। मालिक ग्रह मित्र हों, तब भी इसे हल्का माना जाता है।

षडाष्टक दोष क्या होता है?

जब दोनों की चंद्र राशि एक दूसरे से 6 और 8 की दूरी पर हों, तो इसे षडाष्टक कहते हैं। यह भकूट दोष का एक रूप है। राशि के मालिक एक हों तो यह नहीं माना जाता।

भकूट के कितने अंक होते हैं?

भकूट के कुल 7 अंक होते हैं। दोष न हो तो 7 और दोष हो तो 0 अंक मिलते हैं।

क्या भकूट दोष में शादी हो सकती है?

हाँ, बहुत से मामलों में होती है। पहले परिहार देखिए और फिर पूरी कुंडली। सिर्फ़ एक जाँच से फ़ैसला करना ठीक नहीं।

nav pancham dosh kya hai?

जब दोनों की चंद्र राशि 5 और 9 की दूरी पर हों, तो इसे नवपंचम कहते हैं। यह भी भकूट दोष का एक रूप है। पुरानी मान्यता इसे संतान से जोड़ती है।

दो कुंडलियाँ मुफ़्त मिलाइए

36 गुण, नाड़ी, भकूट और मांगलिक जाँच 1 मिनट में, अपनी जन्म तारीख़ों से।

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