मंगल की महादशा: 7 साल में क्या होता है, सभी अंतर्दशाएँ और उनका समय
SuGraha · अपडेट 29 अक्टूबर 2026
मंगल की महादशा 7 साल की होती है। इसमें हिम्मत, ऊर्जा, ज़मीन मकान, भाई और मुक़ाबले की बातें आगे आती हैं। फल आपकी कुंडली में मंगल के घर और उसकी ताक़त पर टिका है।
मंगल ऊर्जा का ग्रह है। इसकी दशा में काम तेज़ी से होते हैं, पर जल्दबाज़ी और गुस्से पर काबू ज़रूरी है। इस पेज पर आसान भाषा में समझिए कि मंगल की महादशा में क्या होता है।
जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।
मंगल क्या दर्शाता है और इसकी महादशा कितने साल की होती है
मंगल हिम्मत, ऊर्जा, ज़मीन, मकान, भाई, पुलिस और सेना, खेल, ऑपरेशन और गुस्से का कारक है। कारक यानी उस विषय का मुख्य ग्रह।
विंशोत्तरी दशा में मंगल की महादशा 7 साल की होती है।
मंगल की महादशा कब अच्छी चलती है और कब भारी लगती है
भाव यानी कुंडली का एक घर। मंगल मकर राशि में हो, या 3, 6, 10 और 11वें घर में हो, तो इसकी दशा अक्सर अच्छी मानी जाती है। कर्क और सिंह लग्न वालों के लिए मंगल योगकारक होता है, यानी सबसे शुभ ग्रह।
मंगल कर्क राशि में कमज़ोर माना जाता है। 8वें या 12वें घर का मंगल चोट, झगड़े और जल्दबाज़ी बढ़ा सकता है।
- अच्छे संकेत: ज़मीन या मकान, नौकरी में जीत, खेल या मुक़ाबले में सफलता।
- भारी संकेत: गुस्सा, झगड़े, चोट, भाई से मतभेद।
मंगल महादशा की सभी 9 अंतर्दशाएँ और उनका समय
अंतर्दशा यानी महादशा के अंदर का छोटा दौर। मंगल की 7 साल की महादशा में 9 अंतर्दशाएँ आती हैं। पहली अंतर्दशा हमेशा मंगल की अपनी होती है।
हर अंतर्दशा का समय एक तय नियम से निकलता है। महादशा के साल को अंतर्दशा वाले ग्रह के साल से गुणा करके 120 से भाग दिया जाता है। नीचे की तालिका इसी नियम से बनी है।
| क्रम | अंतर्दशा | कितने समय की | आम तौर पर |
|---|---|---|---|
| 1 | मंगल में मंगल | 4 महीने 27 दिन | हिम्मत, ज़मीन, भाई और जल्दबाज़ी की बातें आगे आती हैं। महादशा का ग्रह अपनी ही अंतर्दशा में है, इसलिए उसका असर सबसे साफ़ दिखता है। |
| 2 | मंगल में राहु | 1 साल 18 दिन | विदेश, नई तकनीक, अचानक मौके और उलझन की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है। |
| 3 | मंगल में गुरु | 11 महीने 6 दिन | पढ़ाई, संतान, धर्म, सलाह और बढ़त की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 4 | मंगल में शनि | 1 साल 1 महीने 9 दिन | मेहनत, नौकरी, अनुशासन और देरी की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है। |
| 5 | मंगल में बुध | 11 महीने 27 दिन | पढ़ाई, बातचीत, व्यापार और हिसाब किताब की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रहों में मित्रता नहीं मानी जाती, इसलिए इस दौर में धीरज ज़्यादा चाहिए। |
| 6 | मंगल में केतु | 4 महीने 27 दिन | अलगाव, अध्यात्म और अचानक बदलाव की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है। |
| 7 | मंगल में शुक्र | 1 साल 2 महीने | रिश्ते, शादी, आराम और सुख सुविधा की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है। |
| 8 | मंगल में सूर्य | 4 महीने 6 दिन | पिता, सरकार, पद और आत्मविश्वास की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
| 9 | मंगल में चंद्र | 7 महीने | मन, माँ, घर और भावनाओं की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है। |
मंगल महादशा में राहु की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 1 साल 18 दिन की होती है, जो मंगल की लंबी अंतर्दशाओं में है। इसमें जोश और जल्दबाज़ी दोनों बढ़ सकते हैं।
गाड़ी चलाते समय और बड़े जोखिम लेते समय ख़ास ध्यान रखिए।
मंगल महादशा में गुरु की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 11 महीने 6 दिन की होती है। मंगल और गुरु मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर अच्छा चलता है।
हिम्मत को सही दिशा मिलती है। पढ़ाई, संतान और धर्म के काम आगे बढ़ते हैं।
मंगल महादशा में शनि की अंतर्दशा
यह अंतर्दशा 1 साल 1 महीने 9 दिन की होती है। मंगल और शनि का मेल दबाव और रुकावट दे सकता है, ऐसा माना जाता है।
धीरज रखिए और ज़मीन या पैसे के झगड़ों से बचिए।
मंगल की महादशा से पहले और बाद में कौन सी दशा आती है
मंगल की महादशा से पहले चंद्र की महादशा आती है। मंगल की महादशा ख़त्म होने के बाद राहु की महादशा शुरू होती है, जो 18 साल की होती है।
विंशोत्तरी दशा में 9 ग्रहों की बारी एक तय क्रम में आती है। यह क्रम है केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। पूरा चक्र 120 साल का होता है।
आपकी पहली दशा किस ग्रह की थी, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है। इसीलिए हर व्यक्ति की दशा की तारीख़ें अलग होती हैं।
मंगल की महादशा में लोग क्या करते हैं
नीचे वे आसान बातें हैं जो परंपरा में की जाती हैं। ये मन को शांत और दिनचर्या को ठीक रखने के लिए हैं। इनसे कोई गारंटी नहीं जुड़ी है।
असली फल मंगल की आपकी कुंडली में जगह, उसकी ताक़त और चल रही अंतर्दशा से तय होता है। इसलिए किसी बड़े फ़ैसले से पहले अपनी कुंडली देखना ज़रूरी है।
- माना जाता है कि मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और "ॐ अं अंगारकाय नमः" का जाप मंगल की ऊर्जा को सही दिशा देता है।
- रोज़ कसरत या खेल कीजिए। मंगल की ऊर्जा को शरीर के काम में लगाना सबसे अच्छा उपाय है।
- गुस्से में कोई फ़ैसला मत कीजिए। भाइयों से रिश्ते अच्छे रखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Mangal mahadasha कितने साल की होती है?
मंगल की महादशा 7 साल की होती है। इसमें पहली अंतर्दशा मंगल की अपनी 4 महीने 27 दिन की होती है।
Mangal mahadasha में क्या होता है?
हिम्मत, ऊर्जा, ज़मीन मकान और भाई की बातें आगे आती हैं। फल मंगल के घर और ताक़त पर टिका है।
Mangal mahadasha rahu antardasha कितनी होती है?
मंगल महादशा में राहु की अंतर्दशा 1 साल 18 दिन की होती है।
मंगल के बाद कौन सी दशा आती है?
मंगल की महादशा के बाद राहु की 18 साल की महादशा आती है।
क्या मंगल की महादशा में ज़मीन मिलती है?
मंगल ज़मीन का कारक है, इसलिए इसकी दशा में ज़मीन मकान के योग अक्सर बनते हैं। पर इसके लिए 4थे घर का भी साथ चाहिए।
जन्म तारीख़, समय और जगह से आपकी चल रही दशा, अंतर्दशा और तारीख़ें 1 मिनट में।