कालसर्प दोष क्या होता है? 12 प्रकार, आंशिक कालसर्प और इसका सच

SuGraha · अपडेट 29 अक्टूबर 2026

कालसर्प दोष तब माना जाता है, जब कुंडली के सातों ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही तरफ़ आ जाएँ। ये सात ग्रह हैं सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि। राहु जिस घर में हो, उसके हिसाब से इसके 12 नाम हैं।

यह जानना भी ज़रूरी है कि पराशर जैसे पुराने ग्रंथों में कालसर्प दोष का ज़िक्र नहीं है। बहुत से ज्योतिषी इसे हल्के में लेते हैं। इसलिए इससे डरने की ज़रूरत नहीं है।

अपनी कुंडली में यह मुफ़्त देखिए

जन्म तारीख़, समय और जगह से कुंडली बनाइए, फिर SuGraha से अपनी ही कुंडली के बारे में पूछिए। पहले सवाल मुफ़्त हैं।

कालसर्प दोष कैसे बनता है

राहु और केतु हमेशा एक दूसरे के ठीक आमने सामने रहते हैं। कुंडली को एक गोला समझिए। राहु और केतु इस गोले को दो हिस्सों में बाँट देते हैं।

अगर बाकी सातों ग्रह एक ही हिस्से में हों, तो इसे कालसर्प योग या कालसर्प दोष कहते हैं। मान्यता है कि तब ग्रह राहु और केतु के बीच घिर जाते हैं।

अगर एक भी ग्रह दूसरे हिस्से में हो, तो पूरा कालसर्प नहीं बनता।

कालसर्प दोष के 12 प्रकार

राहु कुंडली के जिस घर में हो, उससे कालसर्प का नाम तय होता है। घर यानी कुंडली का भाव। पहला घर लग्न का होता है।

राहु का घरकालसर्प का नाम
पहलाअनंत
दूसराकुलिक
तीसरावासुकि
चौथाशंखपाल
पाँचवाँपद्म
छठामहापद्म
सातवाँतक्षक
आठवाँकर्कोटक
नौवाँशंखचूड़
दसवाँघातक
ग्यारहवाँविषधर
बारहवाँशेषनाग

आंशिक कालसर्प क्या है

कई बार कोई एक ग्रह राहु या केतु के साथ उसी घर में होता है, या ठीक बाहर होता है। तब कुछ ज्योतिषी इसे आंशिक कालसर्प कहते हैं। आंशिक यानी अधूरा।

यह भी याद रखिए कि बहुत सी कुंडलियों में किसी न किसी रूप में ऐसा योग बन जाता है। इसलिए हर कुंडली में कालसर्प ढूँढना और डराना ठीक नहीं।

क्या कालसर्प दोष से डरना चाहिए

नहीं। पराशर होरा शास्त्र जैसे पुराने ग्रंथ इसका नाम नहीं लेते। यह बाद की परंपरा में आया। आज भी ज्योतिषियों में इस पर एक राय नहीं है।

बहुत से सफल और सुखी लोगों की कुंडली में यह योग है। किसी ग्रह का फल उसके घर, उसकी राशि और उसकी दशा से आता है। दशा यानी ग्रह की बारी का समय। सिर्फ़ एक योग से पूरी ज़िंदगी तय नहीं होती।

अगर कोई कालसर्प का नाम लेकर महँगी पूजा का दबाव डाले, तो रुकिए। पहले अपनी पूरी कुंडली समझिए।

परंपरा में क्या किया जाता है

जो लोग इस परंपरा को मानते हैं, वे आम तौर पर सरल काम करते हैं। जैसे शिव जी की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और नाग पंचमी पर पूजा। ये श्रद्धा के काम हैं, इनमें बड़े ख़र्च की ज़रूरत नहीं।

आपकी कुंडली में कालसर्प है या नहीं, यह SuGraha आपकी कुंडली बनाकर बता सकता है। साथ में यह भी कि राहु और केतु आपकी कुंडली में असल में किन बातों से जुड़े हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कालसर्प दोष क्या होता है?

जब कुंडली के सातों ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही तरफ़ हों, तो इसे कालसर्प दोष कहते हैं। राहु के घर के हिसाब से इसके 12 नाम हैं, जैसे अनंत, कुलिक और वासुकि।

kaal sarp dosh kitne prakar ke hote hain?

12 प्रकार। राहु पहले घर में हो तो अनंत, दूसरे में कुलिक, तीसरे में वासुकि, चौथे में शंखपाल, पाँचवें में पद्म, छठे में महापद्म, सातवें में तक्षक, आठवें में कर्कोटक, नौवें में शंखचूड़, दसवें में घातक, ग्यारहवें में विषधर और बारहवें में शेषनाग।

क्या कालसर्प दोष शास्त्रों में है?

पराशर होरा शास्त्र जैसे पुराने ग्रंथों में कालसर्प दोष का ज़िक्र नहीं मिलता। यह बाद की परंपरा से आया है। इसलिए बहुत से ज्योतिषी इसे हल्का मानते हैं।

kaal sarp dosh kaise pata kare?

अपनी कुंडली में देखिए कि राहु और केतु कहाँ हैं, और बाकी सातों ग्रह एक ही तरफ़ हैं या नहीं। SuGraha आपकी जन्म तारीख़ से कुंडली बनाकर यह मुफ़्त बता देता है।

आंशिक कालसर्प दोष क्या है?

जब कोई एक ग्रह राहु या केतु के घर में हो या ठीक बाहर हो, तो कुछ ज्योतिषी इसे आंशिक यानी अधूरा कालसर्प कहते हैं। इसका असर और भी हल्का माना जाता है।

कालसर्प दोष का उपाय क्या है?

परंपरा में शिव पूजा, महामृत्युंजय जाप और नाग पंचमी की पूजा की जाती है। ये सरल श्रद्धा के काम हैं। किसी महँगी पूजा के दबाव में मत आइए।

अपनी कुंडली में यह मुफ़्त देखिए

जन्म तारीख़, समय और जगह से कुंडली बनाइए, फिर SuGraha से अपनी ही कुंडली के बारे में पूछिए। पहले सवाल मुफ़्त हैं।

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