चंद्र की महादशा: 10 साल में क्या होता है, सभी अंतर्दशाएँ और उनका समय

SuGraha · अपडेट 29 अक्टूबर 2026

चंद्र की महादशा 10 साल की होती है। इसमें मन, माँ, घर, भावनाएँ, लोगों से जुड़ाव और यात्रा की बातें आगे आती हैं। फल आपकी कुंडली में चंद्रमा के घर, उसकी ताक़त और उसके साथ बैठे ग्रहों पर टिका है।

चंद्रमा मन का ग्रह है, इसलिए इसकी दशा में मूड का असर सबसे ज़्यादा दिखता है। इस पेज पर आसान भाषा में समझिए कि चंद्र की महादशा में क्या होता है।

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चंद्र क्या दर्शाता है और इसकी महादशा कितने साल की होती है

चंद्रमा मन, माँ, घर, भावनाएँ, पानी, यात्रा और आम लोगों से जुड़ाव का कारक है। कारक यानी उस विषय का मुख्य ग्रह।

विंशोत्तरी दशा में चंद्र की महादशा 10 साल की होती है।

चंद्र की महादशा कब अच्छी चलती है और कब भारी लगती है

भाव यानी कुंडली का एक घर। पूरा या बढ़ता हुआ चंद्रमा, या वृषभ राशि का चंद्रमा, इसकी दशा में मन को मज़बूत रखता है। केंद्र के घरों में बैठा चंद्रमा भी अच्छा माना जाता है।

चंद्रमा वृश्चिक राशि में कमज़ोर माना जाता है। राहु, केतु या शनि के साथ बैठा चंद्रमा मन में बेचैनी और डर बढ़ा सकता है।

  • अच्छे संकेत: घर में सुख, माँ का साथ, लोगों से जुड़ाव, यात्रा और नया घर।
  • भारी संकेत: मूड बदलना, नींद की कमी, बेवजह चिंता।

चंद्र महादशा की सभी 9 अंतर्दशाएँ और उनका समय

अंतर्दशा यानी महादशा के अंदर का छोटा दौर। चंद्र की 10 साल की महादशा में 9 अंतर्दशाएँ आती हैं। पहली अंतर्दशा हमेशा चंद्र की अपनी होती है।

हर अंतर्दशा का समय एक तय नियम से निकलता है। महादशा के साल को अंतर्दशा वाले ग्रह के साल से गुणा करके 120 से भाग दिया जाता है। नीचे की तालिका इसी नियम से बनी है।

क्रमअंतर्दशाकितने समय कीआम तौर पर
1चंद्र में चंद्र10 महीनेमन, माँ, घर और भावनाओं की बातें आगे आती हैं। महादशा का ग्रह अपनी ही अंतर्दशा में है, इसलिए उसका असर सबसे साफ़ दिखता है।
2चंद्र में मंगल7 महीनेहिम्मत, ज़मीन, भाई और जल्दबाज़ी की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है।
3चंद्र में राहु1 साल 6 महीनेविदेश, नई तकनीक, अचानक मौके और उलझन की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है।
4चंद्र में गुरु1 साल 4 महीनेपढ़ाई, संतान, धर्म, सलाह और बढ़त की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है।
5चंद्र में शनि1 साल 7 महीनेमेहनत, नौकरी, अनुशासन और देरी की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है।
6चंद्र में बुध1 साल 5 महीनेपढ़ाई, बातचीत, व्यापार और हिसाब किताब की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है।
7चंद्र में केतु7 महीनेअलगाव, अध्यात्म और अचानक बदलाव की बातें आगे आती हैं। राहु केतु का फल उनकी राशि और साथ बैठे ग्रहों पर ज़्यादा टिका माना जाता है।
8चंद्र में शुक्र1 साल 8 महीनेरिश्ते, शादी, आराम और सुख सुविधा की बातें आगे आती हैं। दोनों के बीच सम संबंध माना जाता है, इसलिए फल कुंडली पर ज़्यादा टिका है।
9चंद्र में सूर्य6 महीनेपिता, सरकार, पद और आत्मविश्वास की बातें आगे आती हैं। दोनों ग्रह मित्र माने जाते हैं, इसलिए यह दौर अक्सर आसानी से चलता है।

चंद्र महादशा में राहु की अंतर्दशा

यह अंतर्दशा 1 साल 6 महीने की होती है। राहु मन में उलझन और बेचैनी ला सकता है, इसलिए इस दौर में मन का ख़ास ध्यान रखिए।

विदेश यात्रा या नए काम के मौके भी इस दौर में बनते हैं।

चंद्र महादशा में शनि की अंतर्दशा

यह अंतर्दशा 1 साल 7 महीने की होती है। चंद्र और शनि का मेल मन पर बोझ बढ़ा सकता है, ऐसा माना जाता है।

ज़िम्मेदारी बढ़ सकती है। माँ की सेहत और अपनी नींद का ध्यान रखिए।

चंद्र महादशा में बुध की अंतर्दशा

यह अंतर्दशा 1 साल 5 महीने की होती है। पढ़ाई, बातचीत और व्यापार के काम आगे बढ़ते हैं।

चंद्रमा बुध को मित्र मानता है, पर बुध चंद्रमा को शत्रु मानता है। इसलिए दिल और दिमाग़ में खींचतान हो सकती है।

चंद्र की महादशा से पहले और बाद में कौन सी दशा आती है

चंद्र की महादशा से पहले सूर्य की महादशा आती है। चंद्र की महादशा ख़त्म होने के बाद मंगल की महादशा शुरू होती है, जो 7 साल की होती है।

विंशोत्तरी दशा में 9 ग्रहों की बारी एक तय क्रम में आती है। यह क्रम है केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध। पूरा चक्र 120 साल का होता है।

आपकी पहली दशा किस ग्रह की थी, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है। इसीलिए हर व्यक्ति की दशा की तारीख़ें अलग होती हैं।

चंद्र की महादशा में लोग क्या करते हैं

नीचे वे आसान बातें हैं जो परंपरा में की जाती हैं। ये मन को शांत और दिनचर्या को ठीक रखने के लिए हैं। इनसे कोई गारंटी नहीं जुड़ी है।

असली फल चंद्र की आपकी कुंडली में जगह, उसकी ताक़त और चल रही अंतर्दशा से तय होता है। इसलिए किसी बड़े फ़ैसले से पहले अपनी कुंडली देखना ज़रूरी है।

  • माना जाता है कि सोमवार को शिव जी को जल चढ़ाना और "ॐ सों सोमाय नमः" का जाप मन को शांत रखता है।
  • माँ और बड़ी महिलाओं का सम्मान और सेवा कीजिए।
  • नींद पूरी लीजिए और रोज़ थोड़ा ध्यान कीजिए। चंद्र की दशा में मन की देखभाल सबसे ज़रूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Chandra mahadasha कितने साल की होती है?

चंद्र की महादशा 10 साल की होती है। इसमें पहली अंतर्दशा चंद्र की अपनी 10 महीने की होती है।

Chandra mahadasha में क्या होता है?

मन, माँ, घर, भावनाएँ और यात्रा की बातें आगे आती हैं। फल चंद्रमा की ताक़त और साथ बैठे ग्रहों पर टिका है।

Chandra mahadasha rahu antardasha कितनी होती है?

चंद्र महादशा में राहु की अंतर्दशा 1 साल 6 महीने की होती है।

Chandra mahadasha shani antardasha में क्या होता है?

यह 1 साल 7 महीने की होती है। इसमें ज़िम्मेदारी और मन पर बोझ बढ़ सकता है।

चंद्र के बाद कौन सी दशा आती है?

चंद्र की महादशा के बाद मंगल की 7 साल की महादशा आती है।

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