अध्याय 2 — आकाश एक बड़ी घड़ी है

दीवार वाली घड़ी का राज़

एक छोटा-सा खेल खेलें?

अपने घर की दीवार-घड़ी को देखिए। उस पर कितने नंबर हैं?

बारह।

अब एक सवाल। बारह ही क्यों? दस क्यों नहीं? पंद्रह क्यों नहीं?

हम गिनती दस तक की उँगलियों पर सीखते हैं। पैसे सौ के हिसाब से गिनते हैं। पर घड़ी? घड़ी ज़िद करके बारह पर अटकी है।

इसका राज़ बहुत पुराना है।

बहुत पहले, जब घड़ी थी ही नहीं, तब भी लोगों को समय चाहिए था। किसान को पता होना था कि बीज कब बोएँ। नाव वाले को पता होना था कि रात में किस तरफ़ चलें।

तो वे ऊपर देखते थे।

सूरज, चाँद, और तारे कभी रुकते नहीं। ये रोज़ एक ही रास्ते पर, एक ही चाल से घूमते दिखते हैं। बिलकुल घड़ी की सुइयों की तरह।

यानी दुनिया की सबसे पहली घड़ी दीवार पर नहीं थी।

सबसे पहली घड़ी आकाश था।

और हमारी दीवार-घड़ी? वह तो आकाश-घड़ी की छोटी-सी नक़ल है। बारह का आँकड़ा भी वहीं से आया। यह इत्तेफ़ाक़ नहीं है।

360 का गोला, 12 टुकड़े

अब ज़रा इस आकाश-घड़ी को पास से देखते हैं।

आकाश एक बहुत बड़ा गोला है। और हर गोले का एक पूरा चक्कर होता है 360 डिग्री (Degree) का। डिग्री यानी गोले को नापने का पैमाना। जैसे कपड़ा मीटर में नपता है, गोला डिग्री में नपता है।

पुराने ज़माने के विद्वानों ने इस 360 डिग्री के गोले को 12 बराबर टुकड़ों में काटा। जैसे जन्मदिन का केक काटते हैं, बराबर-बराबर।

360 ÷ 12 = 30

यानी हर टुकड़ा 30 डिग्री का। और इन्हीं 12 टुकड़ों का नाम है — राशियाँ (Signs)।

नाम आपने सुने ही होंगे:

मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन।

बस! राशि का इतना ही मतलब है, आकाश-घड़ी का एक खाना। जैसे घड़ी में 1 से 12 तक खाने हैं, वैसे आकाश में मेष से मीन तक खाने हैं।

एक डर अभी निकाल दें। बहुत लोग समझते हैं कि राशि कोई जादुई चीज़ है। कहते हैं, "मेरी राशि ख़राब है", "उसकी राशि भारी है"। नहीं भई! राशि तो बस आकाश का एक हिस्सा है। जैसे नक़्शे पर राजस्थान एक हिस्सा है। हिस्सा न अच्छा होता है, न बुरा। वह बस होता है। कहानी वहाँ से शुरू होती है कि कौन उसमें खड़ा है, और कब। और वह कहानी अभी दूर है।

और याद है अध्याय 1 की पते वाली पहेली? वहाँ हमने कहा था — राशि = शहर। तो समझ लीजिए, आकाश-घड़ी के ये 12 खाने असल में 12 शहर हैं। ग्रह इन्हीं शहरों में घूमते रहते हैं।

सुइयाँ कौन हैं?

घड़ी में खाने तो हैं, पर घड़ी चलती है सुइयों से।

तो आकाश-घड़ी की सुइयाँ कौन हैं?

ग्रह (Planets)।

और जैसे घड़ी की तीनों सुइयाँ अलग-अलग रफ़्तार से चलती हैं, वैसे ही ग्रह भी।

  • चाँद सबसे तेज़ है, सेकंड वाली सुई। पूरे 12 खानों का चक्कर सिर्फ़ 27 दिन में पूरा कर लेता है।
  • सूरज की चाल बीच वाली है, एक खाने में एक महीना। पूरा चक्कर एक साल में।
  • शनि सबसे सुस्त है, एक खाने में ढाई साल! पूरा चक्कर लगाने में तीस साल लगा देता है।

अब सबसे मज़ेदार बात।

घड़ी की सुइयाँ कभी रुकती नहीं। हर पल आकाश-घड़ी का नज़ारा थोड़ा-सा बदल जाता है।

और कुंडली (Horoscope) क्या है? आपके जन्म के ठीक उसी पल की आकाश-घड़ी की फ़ोटो। कोई सुई कहाँ थी, कौन-सा ग्रह किस खाने में था, सब उस फ़ोटो में क़ैद।

इस बात को जेब में रख लीजिए। आगे यह बहुत काम आएगी।

चलिए, स्टाफ़ से मिलते हैं

सुइयाँ यानी ग्रह कुल 9 हैं।

आगे चलकर आप देखेंगे कि ये 9 ग्रह आपकी ज़िंदगी के दफ़्तर के 9 कर्मचारी हैं। हर एक का अपना काम, अपना मिज़ाज। तो चलिए, आज सिर्फ़ जान-पहचान कर लेते हैं। हाथ मिलाइए।

  • सूर्य (Sun) दफ़्तर के बड़े साहब। रौब वाले, पर दिल के साफ़।
  • चंद्र (Moon) सबका ख़याल रखने वाली मम्मी। मन की बात सबसे पहले इन्हें पता चलती है।
  • मंगल (Mars) जोश से भरा फ़ौजी जवान। हिम्मत का काम हो, तो सबसे आगे।
  • बुध (Mercury) क्लास का होशियार बच्चा। बोलने, लिखने और हिसाब में सबसे तेज़।
  • गुरु (Jupiter) ज्ञानी गुरुजी। समझदारी की बात और आशीर्वाद, दोनों इन्हीं से मिलते हैं।
  • शुक्र (Venus) सजने-सँवरने वाला कलाकार। सुंदरता, प्यार और आराम का महकमा इनका है।
  • शनि (Saturn) सख़्त मास्टरजी। देर लगाते हैं, पर मेहनत का पूरा-पूरा फल देते हैं।
  • राहु (Rahu) धुएँ वाला जादूगर। बड़े-बड़े सपने दिखाता है, पर पकड़ में नहीं आता।
  • केतु (Ketu) चुप रहने वाले साधु बाबा। दुनियादारी से मन उठा हुआ।

इन नौ चेहरों को अच्छे से देख लीजिए। पूरी किताब में ये बार-बार मिलेंगे, इन्हीं शक्लों में।

और एक मज़ेदार काम कीजिए। इन नौ में से सोचिए। आप किससे सबसे ज़्यादा मिलते-जुलते हैं? कोई घर में फ़ौजी जवान जैसा जोशीला है, कोई मास्टरजी जैसा अनुशासन वाला। अभी यह सिर्फ़ खेल है, कोई भविष्यवाणी नहीं। पर नौ चेहरों को याद रखने का इससे अच्छा तरीक़ा कोई नहीं। अपने घर के लोगों को भी इन नौ में बाँटकर देखिए। हँसी ज़रूर आएगी।

एक छोटी-सी बात राहु और केतु के बारे में। बाक़ी सात ग्रह आकाश में दिखते हैं। पर राहु-केतु दिखते नहीं। ये चाँद के रास्ते के दो ख़ास बिंदु हैं। शरीर नहीं, फिर भी असर पूरा। इसीलिए जादूगर और साधु बाबा, दोनों "दिखते नहीं, पर होते ज़रूर हैं।"

अभी कोई भविष्यवाणी नहीं!

एक बात साफ़ कर दें।

इस अध्याय में हमने किसी ग्रह का फल नहीं बताया। "मंगल ऐसा करता है, शनि वैसा करता है", ऐसा कुछ नहीं।

क्यों? क्योंकि अध्याय 1 याद कीजिए। अधूरा पता, अधूरा जवाब। सिर्फ़ शहर देखकर चिट्ठी नहीं बँटती। सिर्फ़ राशि देखकर भविष्यवाणी नहीं होती।

अभी हमने बस घड़ी देखी है और सुइयों से हाथ मिलाया है। पता पूरा करना अभी बाक़ी है। अगले अध्याय में चलेंगे मोहल्ले की ओर। वहाँ आपको आकाश के 27 मोहल्ले मिलेंगे, और एक ऐसी रटने वाली ट्रिक मिलेगी जो पूरी किताब में आपके साथ चलेगी। तैयार रहिए!

SuGraha पर करके देखो

आज का काम 2 मिनट का है:

  1. फ़ोन में sugraha.com खोलो और अपनी सेव की हुई कुंडली खोलो (अध्याय 1 में बनाई थी, याद है?)।
  2. ग्रहों की सूची में चंद्र (Moon) ढूँढो।
  3. देखो, आपके जन्म के वक़्त चाँद किस राशि में था?
  4. वह राशि एक काग़ज़ पर लिखो और किताब में यहीं रख लो। अगले अध्यायों में हम इसी चाँद का पूरा पता निकालेंगे।
एक लाइन में

आकाश 360 डिग्री की एक बड़ी घड़ी है — 12 राशियाँ उसके खाने हैं और 9 ग्रह उसकी सुइयाँ।

छोटा सा टेस्ट
  1. आकाश-घड़ी में कुल कितने खाने (राशियाँ) हैं, और हर खाना कितने डिग्री का है?
  2. सबसे तेज़ चलने वाली "सुई" कौन-सी है — सूरज, चाँद, या शनि?
  3. "सख़्त मास्टरजी — देर लगाते हैं, पर मेहनत का पूरा फल देते हैं" — यह पहचान किस ग्रह की है?