वापसी पर स्वागत
नमस्ते! फिर मिले। आपको फिर से देखकर अच्छा लगा।
पहले तो शाबाश। आप भाग 1 पास करके आए हैं। यानी अब आपको पता है कि राशि शहर है, नक्षत्र मोहल्ला है, और सब घर का नंबर। आपने कस्पल सब-लॉर्ड से "हाँ/ना" पूछना सीख लिया, कारकों की सीढ़ी चढ़ ली, और दशा का टाइम-टेबल भी देख लिया।
भाग 1 ने आपको साइकिल चलाना सिखाया। यह किताब आपको सड़क पर उतारेगी।
फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है: अब हर अध्याय में एक असली जैसा सवाल होगा। वही सवाल, जो लोग सचमुच पूछते हैं। शादी कब? नौकरी कब? पैसा कब? और हर सवाल का जवाब हम एक ही तरीक़े से निकालेंगे, बार-बार, जब तक वह तरीक़ा आपकी आदत न बन जाए।
तीन छोटी बातें, फिर शुरू करते हैं:
- भाग 1 पास में रखिए। जगह-जगह हम कहेंगे "याद है भाग 1 का अध्याय 8?" भूल गए हों तो झाँक लीजिएगा। कोई शर्म नहीं।
- अध्याय 1 और 2 मत छोड़िएगा। पूरी किताब इन्हीं दो अध्यायों के कंधों पर खड़ी है। बाक़ी अध्याय आगे-पीछे भी पढ़ लेंगे तो चलेगा, पर ये दोनों पहले।
- वही पुराना वादा: हर बात करके देखी जाएगी। फ़ोन पास रखिए, sugraha.com खुला रखिए।
और आख़िर में छह परिशिष्ट हैं। दो का नाम अभी जान लीजिए, क्योंकि उन्हीं पर यह किताब पूरी होती है:
- परिशिष्ट द — सात कुंडलियाँ, क़दम-दर-क़दम पढ़ी हुई। हर एक में वही पाँच क़दम, बार-बार, जब तक आदत न बन जाए।
- परिशिष्ट इ — अंतिम इम्तिहान। एक नई कुंडली, बारह सवाल, और अपने आपको नंबर देने का तरीक़ा। किताब ने जो वादा किया था, उसकी जाँच वहीं होगी।
बाक़ी तीन परिशिष्ट (अ, ब, स) आपकी मेज़ पर पड़ी रहने वाली तालिकाएँ हैं, और आख़िरी (ई) उत्तर-कुंजी है।
चलिए। मास्टर की राह लंबी है, पर मज़ेदार है।
— सी. जी. पांडे
परिशिष्ट उ की कार्यपुस्तिका हर नई कुंडली के साथ भरिए। उसमें सवाल से निष्कर्ष तक पूरा फ़ॉर्म और अपनी पढ़ाई जाँचने का रिकॉर्ड है।