शुरुआत

यह किताब बोरिंग क्यों नहीं है

नमस्ते!

एक बात सच-सच बताइए। आपने ज्योतिष की कोई किताब खोली, तीन पन्ने पढ़े, और... बंद कर दी। हुआ है ना?

ग़लती आपकी नहीं थी। ग़लती किताब की थी।

इस किताब में हमने तीन वादे ख़ुद से किए हैं:

  1. हर बात इतनी आसान होगी कि पाँचवीं क्लास का बच्चा भी समझ ले।
  2. हर बात करके देखी जाएगी, सिर्फ़ पढ़ी नहीं। आपका फ़ोन ही आपकी प्रयोगशाला है।
  3. बोर किया, तो पैसे वसूल। मज़ाक नहीं, हर अध्याय में कहानी है, तस्वीर है, और एक छोटा-सा खेल है।

एक वादा आपसे भी चाहिए: अध्याय छोड़कर मत पढ़िएगा। यह किताब सीढ़ी है, बीच की सीढ़ी ग़ायब हो तो चोट लगती है।

चलिए, पहला कदम लेते हैं।

— सी. जी. पांडे

इस किताब को इस्तेमाल करने का तरीक़ा

  • जहाँ यह निशान दिखे, फ़ोन उठाओ, sugraha.com खोलो, करके देखो।
  • जहाँ यह दिखे, अध्याय की सबसे ज़रूरी बात, एक लाइन में।
  • जहाँ यह दिखे, छोटा टेस्ट। जवाब किताब के आख़िर में।
  • जहाँ यह दिखे, ज़रूरी सावधानी। इसे कभी मत छोड़ना।

किताब के आख़िर में पाँच परिशिष्ट हैं। इन्हें ज़रूर देखिए:

  • परिशिष्ट क — 9 ग्रहों की पहचान-पत्रिका
  • परिशिष्ट ख — 12 कमरों की डायरेक्टरी
  • परिशिष्ट ग — चार्ट पढ़ने की चीट-शीट। सात शीट, जिन्हें पास रखकर आप कोई भी कुंडली खोल सकते हैं। नक्षत्रों की पूरी तालिका, सब का हिसाब, ऐप की टेबल पढ़ने का तरीक़ा, और दशा का गणित।
  • परिशिष्ट घ — शब्दकोश। कोई शब्द अटके तो यहाँ देखिए।
  • परिशिष्ट ङ — उत्तर-कुंजी। हर टेस्ट के जवाब।

एक सलाह: परिशिष्ट ग को पहले ही एक बार पलट लीजिए। पता रहेगा कि मदद कहाँ रखी है।

सीखने की अपनी जाँच के लिए परिशिष्ट च पढ़िए। उसमें हर पड़ाव का छोटा काम और गलती होने पर लौटने का अध्याय दिया गया है।